"अक्सर बेहतर की तलाश में हम वह भी खो देते हैं, जो हमारे सामने होताहै। "व्रुशाली छठी कक्षा में पढ़ती थी। एक दिन मास्टर जी छात्रों को समझाते हैं की लालच बुरी बला है इससे बचना चाहिये। इस पर व्रुशाली बोली हम तो बच्चे हैं और बच्चे तो इस उम्र में थोड़े लालची होते ही हैं। मास्टर जी बोले लालच की कोई उम्र नहीं होती, लालसी इंसान हमेशा लालची ही रहता है। व्रुशाली बोली लेकिन हमें तो पता भी नहीं है आखिर लालच होता क्या है, हम लालच कैसे कर सकते हैं? मास्टर जी बोले ठीक है एक काम करो। यहीं पास में एक चॉकलेट फैक्टरी है, वहाँ हर तरह की चॉकलेट बनती है। वहाँ जाओ और जो चॉकलेट तुम्हें सबसे ज्यादा पसंद हो वो ले आओ। लेकिन शर्त सिर्फ इतनी है की एक बार तुम आगे बढ़ गए तो फिर पीछे वापस नहीं जा सकते। व्रुशाली ने सोचा इसमे कोन सी बड़ी बात है, और वो फैक्टरी में घुस गयी। वहाँ लाइन में एक से एक चॉकलेट रखी थी। घुसते ही व्रुशाली को उसकी फेवरेट चॉको पाई दिखीउसने सोचा यह तो खाती ही रहती हूँ आज कुछ नया ट्राई करती हूँ। फिर उसे 5 स्टार, डेयरी मिल्क सिल्क दिखी।उसने सोचा हैं तो सब अच्छी पर क्या पता आगे और भी अच्छी हों। करते-करते उसने पूरी फैक्टरी घूम ली और उसकी फेवरेट चॉको पाई जो उसे सबसे ज्यादा पसंद थी वह सबसे पहले रखी थी उसे छोड़ दिया एवं सारीअच्छी चॉकलेट पीछे रह गयी और आखिरी में उसे संतरे वाली टॉफी ही मिलती है और उसे उसी से संतोष करना पड़ता है। मास्टर जी ने समझाया कीबेटा इसी को लालच कहते हैं।"जो हमारे सामने होता है, हम उसे यह कहकर अनदेखा कर देते हैं कि मेरेलिए तो इससे बड़ा कुछ नियत है। जबकि वह बड़ा भी हमारी नजरों के सामने से निकाल जाता है और हम उसे पहचान भी नहीं पाते।"
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